श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.299.15 
अक्रोधन: क्रुध्यतां वै विशिष्ट-
स्तथा तितिक्षुरतितिक्षोर्विशिष्ट:।
अमानुषान्मानुषो वै विशिष्ट-
स्तथाज्ञानाज्ज्ञानविद् वै विशिष्ट:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
क्रोध न करने वाला मनुष्य क्रोधी मनुष्यों से श्रेष्ठ है। सहनशील मनुष्य असहिष्णु मनुष्य से महान है। मनुष्य, मनुष्येतर प्राणियों से श्रेष्ठ है और ज्ञानी, अज्ञानी से श्रेष्ठ है। 15॥
 
A person who does not get angry is better than angry people. A tolerant man is greater than an intolerant one. The human being is superior to the non-human creatures and the knowledgeable one is better than the ignorant one. 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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