श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 299: हंसगीता-हंसरूपधारी ब्रह्माका साध्यगणोंको उपदेश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.299.1 
युधिष्ठिर उवाच
सत्यं दमं क्षमां प्रज्ञां प्रशंसन्ति पितामह।
विद्वांसो मनुजा लोके कथमेतन्मतं तव॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! संसार में बहुत से विद्वान लोग सत्य, संयम, क्षमा और बुद्धि की प्रशंसा करते हैं। इस विषय में आपकी क्या राय है?"॥1॥
 
Yudhishthira asked, "Grandfather! Many learned people in the world praise truth, self-control, forgiveness and wisdom. What is your opinion on this matter?"॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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