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mahabharat 12.298.39: परलोक प्राप्ति में माता-पिता भी किसी की सहायता नहीं कर सकते। परलोक के मार्ग में तो स्वयं किया गया दान या यज्ञ ही यात्रा-व्यय के रूप में काम आता है। प्रत्येक प्राणी अपने-अपने कर्मों का फल भोगता है॥ 39॥   |   mahabharat अध्याय 12.298: पराशरगीताका उपसंहार—राजा जनकके विविध प्रश्नोंका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 298: पराशरगीताका उपसंहार—राजा जनकके विविध प्रश्नोंका उत्तर  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.298.39 
न माता न पिता किंचित् कस्यचित् प्रतिपद्यते।
दानपथ्यौदनो जन्तु: स्वकर्मफलमश्नुते॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
परलोक प्राप्ति में माता-पिता भी किसी की सहायता नहीं कर सकते। परलोक के मार्ग में तो स्वयं किया गया दान या यज्ञ ही यात्रा-व्यय के रूप में काम आता है। प्रत्येक प्राणी अपने-अपने कर्मों का फल भोगता है॥ 39॥
 
Even mother and father cannot help anyone in attaining the other world. In the path of the other world, only the charity or sacrifices done by oneself serve as the travel expenses. Every living being enjoys the fruits of his own actions.॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)