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पराशर उवाच
असङ्ग: श्रेयसो मूलं ज्ञानं चैव परा गति:।
चीर्णं तपो न प्रणश्येद्वाप: क्षेत्रे न नश्यति॥ ३॥
अनुवाद
पराशर बोले, "हे राजन! आसक्ति का अभाव ही कल्याण का मूल कारण है। ज्ञान ही सर्वोत्तम मार्ग है। स्वयं किया गया तप और सुपात्र को दिया गया दान - ये कभी नष्ट नहीं होते।"
Parashara said, "O King! Absence of attachment is the main reason for good. Knowledge is the best path. Penance done by oneself and charity given to a deserving person - these never get destroyed."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥