Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.298.25: जैसे पके हुए मिट्टी के बर्तन में रखा हुआ जल आदि द्रव पदार्थ न तो रिसता है और न नष्ट होता है, उसी प्रकार तप से तपा हुआ सूक्ष्म शरीर ब्रह्मलोक तक के विषयों का अनुभव कर सकता है॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 12.298: पराशरगीताका उपसंहार—राजा जनकके विविध प्रश्नोंका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 298: पराशरगीताका उपसंहार—राजा जनकके विविध प्रश्नोंका उत्तर  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.298.25 
मृण्मये भाजने पक्वे यथा वै न श्यति द्रव:।
तथा शरीरं तपसा तप्तं विषयमश्नुते॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जैसे पके हुए मिट्टी के बर्तन में रखा हुआ जल आदि द्रव पदार्थ न तो रिसता है और न नष्ट होता है, उसी प्रकार तप से तपा हुआ सूक्ष्म शरीर ब्रह्मलोक तक के विषयों का अनुभव कर सकता है॥ 25॥
 
Just as liquid substances such as water kept in a baked earthen pot neither get leaked nor get destroyed, similarly the subtle body heated by austerities can experience the objects even up to the Brahmaloka.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)