श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 297: पराशरगीता—नाना प्रकारके धर्म और कर्तव्योंका उपदेश  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.297.8 
न कश्चित् त्राति वै राजन् दिष्टान्तवशमागतम्।
सावशेषायुषं चापि कश्चिन्नैवापकर्षति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! जो मनुष्य मृत्यु के वश में है, उसे कोई नहीं बचा सकता और जो अभी जीवित है, उसे कोई नहीं मार सकता। ॥8॥
 
O King! No one can save a person who is in the grip of death and no one can kill a person who has still some life left. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)