श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 297: पराशरगीता—नाना प्रकारके धर्म और कर्तव्योंका उपदेश  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.297.13 
द्वितीयं कारणं तत्र नान्यत् किंचन विद्यते।
तद् देहं देहिनां युक्तं पञ्चभूतेषु वर्तते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उनके उस गति को प्राप्त होने का आत्महत्या के पाप के अतिरिक्त और कोई कारण नहीं है। उन प्राणियों के लिए उचित है कि वे उस पंचभूत शरीर को प्राप्त करें॥13॥
 
There is no other reason for their attaining that state except the sin of suicide. It is appropriate for those beings to get that body which is made up of five elements.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)