Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.296.8-9: नरेश्वर! क्षत्रिय, अतिरथ, अम्बष्ठ, उग्र, वैदेह, श्वपक, पुल्कस, स्तेन, निषद, सूत, मागध, अयोग, करण, व्रात्य और चाण्डाल - ये ब्राह्मण अनुलोम और विलोम वर्ण की स्त्रियों के परस्पर संयोग से चार वर्णों में उत्पन्न होते हैं। 8-9॥ | mahabharat अध्याय 12.296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नरेश्वर! क्षत्रिय, अतिरथ, अम्बष्ठ, उग्र, वैदेह, श्वपक, पुल्कस, स्तेन, निषद, सूत, मागध, अयोग, करण, व्रात्य और चाण्डाल - ये ब्राह्मण अनुलोम और विलोम वर्ण की स्त्रियों के परस्पर संयोग से चार वर्णों में उत्पन्न होते हैं। 8-9॥
Nareshwar! Kshatriya, Atirath, Ambashtha, Ugra, Vaideha, Shvapak, Pulkas, Sten, Nishad, Suta, Magadh, Ayog, Karan, Vratya and Chandal - these Brahmins are born from the four varnas by mutual association with women of Anulom and Vilom varnas. 8-9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥