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mahabharat 12.296.7: हे महात्मन! इस प्रकार ब्रह्मा के चार अंगों से चार वर्णों (जातियों) की उत्पत्ति हुई। इनके अतिरिक्त जो अन्य मनुष्य हैं, वे वर्णसंकर (विभिन्न जातियों से मिश्रित) कहलाते हैं, क्योंकि वे इन चारों वर्णों के मिश्रण से उत्पन्न होते हैं॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.296.7 
चतुर्णामेव वर्णानामागम: पुरुषर्षभ।
अतोऽन्ये त्वतिरिक्ता ये ते वै संकरजा: स्मृता:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे महात्मन! इस प्रकार ब्रह्मा के चार अंगों से चार वर्णों (जातियों) की उत्पत्ति हुई। इनके अतिरिक्त जो अन्य मनुष्य हैं, वे वर्णसंकर (विभिन्न जातियों से मिश्रित) कहलाते हैं, क्योंकि वे इन चारों वर्णों के मिश्रण से उत्पन्न होते हैं॥7॥
 
O great man! In this way, the four Varnas (castes) originated from the four limbs of Brahma. The other human beings, apart from these, are called Varnasankar (mixed with different castes) because they are born from the mixture of these four Varnas. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)