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mahabharat 12.296.6: तात! जो मुख से उत्पन्न हुए, वे ब्राह्मण कहलाए। दोनों भुजाओं से उत्पन्न हुए मनुष्य क्षत्रिय माने गए। राजन! जो जंघाओं से उत्पन्न हुए, वे धनवान (वैश्य) कहलाए; और जो पैरों से उत्पन्न हुए, वे सेवक या शूद्र कहलाए। 6॥   |   mahabharat अध्याय 12.296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.296.6 
मुखजा ब्राह्मणस्तात बाहुजा: क्षत्रिया: स्मृता:।
ऊरुजा धनिनो राजन् पादजा: परिचारका:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तात! जो मुख से उत्पन्न हुए, वे ब्राह्मण कहलाए। दोनों भुजाओं से उत्पन्न हुए मनुष्य क्षत्रिय माने गए। राजन! जो जंघाओं से उत्पन्न हुए, वे धनवान (वैश्य) कहलाए; और जो पैरों से उत्पन्न हुए, वे सेवक या शूद्र कहलाए। 6॥
 
Tat! Those who were born from the mouth were called Brahmins. Humans born with both arms were considered Kshatriyas. Rajan! Those who were born from the thighs were called wealthy (Vaishya); Those who originated from the feet were called servants or Shudras. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)