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mahabharat 12.296.5: जो लोग धर्म को जानते हैं, वे जानते हैं कि जब प्रजापति ब्रह्मा ने मनुष्य-सृष्टि की रचना आरम्भ की, तब उनके मुख, भुजाओं, जंघाओं और पैरों से मनुष्य उत्पन्न हुए ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.296.5 
वक्त्राद् भुजाभ्यामूरुभ्यां पद्भॺां चैवाथ जज्ञिरे।
सृजत: प्रजापतेर्लोकानिति धर्मविदो विदु:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जो लोग धर्म को जानते हैं, वे जानते हैं कि जब प्रजापति ब्रह्मा ने मनुष्य-सृष्टि की रचना आरम्भ की, तब उनके मुख, भुजाओं, जंघाओं और पैरों से मनुष्य उत्पन्न हुए ॥5॥
 
Those who are versed in Dharma know that when Prajapati Brahma began creating the human world, human beings were born from his mouth, arms, thighs and feet. ॥5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)