Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.296.4: उत्तम खेत और उत्तम बीज से जो जन्म होता है, वह शुद्ध होता है। यदि खेत और बीज में से एक भी निकृष्ट हो, तो उससे निकृष्ट सन्तान ही उत्पन्न होती है ॥4॥ | mahabharat अध्याय 12.296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुक्षेत्राच्च सुबीजाच्च पुण्यो भवति सम्भव:।
अतोऽन्यतरतो हीनादवरो नाम जायते॥ ४॥
अनुवाद
उत्तम खेत और उत्तम बीज से जो जन्म होता है, वह शुद्ध होता है। यदि खेत और बीज में से एक भी निकृष्ट हो, तो उससे निकृष्ट सन्तान ही उत्पन्न होती है ॥4॥
The birth that takes place from a good field and a good seed is pure. If even one of the field and the seed is of inferior quality, then only inferior offspring is born from it. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥