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श्लोक 12.296.39  |
सर्वे वर्णा धर्मकार्याणि सम्यक्
कृत्वा राजन् सत्यवाक्यानि चोक्त्वा।
त्यक्त्वाधर्मं दारुणं जीवलोके
यान्ति स्वर्गं नात्र कार्यो विचार:॥ ३९॥ |
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| अनुवाद |
| राजन! सभी वर्णों के लोग अपने-अपने धर्मानुसार अपने-अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए, सदा सत्य बोलते हुए और घोर पापकर्मों का सर्वथा त्याग करके इस जीवनलोक में स्वर्ग को जाते हैं। इस विषय में अन्य कोई विचार नहीं करना चाहिए। 39॥ |
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| Rajan! People of all varnas go to heaven in this world of life after performing their duties well according to their respective religions, always speaking the truth and completely renouncing the terrible sinful acts. There should be no other thought in this matter. 39॥ |
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इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि पराशरगीतायां षण्णवत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २९६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें पराशरगीताविषयक दो सौ छानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २९६॥
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