Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.296.34: यदि कोई उच्च पदस्थ व्यक्ति भी कोई निंदनीय कार्य करता है तो वह कार्य उसे कलंकित करता है; अतः बुरे कर्म करना किसी भी दृष्टि से अच्छा नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 12.296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.296.34 
जात्या प्रधानं पुरुषं कुर्वाणं कर्म धिक्कृतम्।
कर्म तद् दूषयत्येनं तस्मात् कर्म न शोभनम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई उच्च पदस्थ व्यक्ति भी कोई निंदनीय कार्य करता है तो वह कार्य उसे कलंकित करता है; अतः बुरे कर्म करना किसी भी दृष्टि से अच्छा नहीं है।
 
Even if a person of high standing commits a reprehensible act, then that act stains him; hence doing bad deeds is not good from any point of view.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)