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mahabharat 12.296.30: अन्य जाति के लोग भी अच्छे आचरण को अपनाकर इस लोक और परलोक में सुख और आनंद प्राप्त करते हैं ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 12.296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.296.30 
यथा यथा हि सद्‍वृत्तमालम्बन्तीतरे जना:।
तथा तथा सुखं प्राप्य प्रेत्य चेह च मोदते॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
अन्य जाति के लोग भी अच्छे आचरण को अपनाकर इस लोक और परलोक में सुख और आनंद प्राप्त करते हैं ॥30॥
 
People of other castes too, as they adopt good conduct, derive happiness and enjoy bliss in this world and the next. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)