Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.296.20: पराशर बोले, "हे राजन! दान लेना, यज्ञ कराना और विद्यादान करना ब्राह्मणों के विशेष कर्तव्य हैं (जो उनकी जीविका के साधन हैं)। प्रजा की रक्षा करना क्षत्रिय का सर्वोत्तम कर्तव्य है।" | mahabharat अध्याय 12.296: पराशरगीता—वर्णविशेषकी उत्पत्तिका रहस्य, तपोबलसे उत्कृष्ट वर्णकी प्राप्ति, विभिन्न वर्णोंके विशेष और सामान्य धर्म, सत्कर्मकी श्रेष्ठता तथा हिंसारहित धर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पराशर उवाच
प्रतिग्रहो याजनं च तथैवाध्यापनं नृप।
विशेषधर्मा विप्राणां रक्षा क्षत्रस्य शोभना॥ २०॥
अनुवाद
पराशर बोले, "हे राजन! दान लेना, यज्ञ कराना और विद्यादान करना ब्राह्मणों के विशेष कर्तव्य हैं (जो उनकी जीविका के साधन हैं)। प्रजा की रक्षा करना क्षत्रिय का सर्वोत्तम कर्तव्य है।"
Parashara said, "O King! Accepting donations, conducting sacrifices and imparting knowledge are the special duties of Brahmins (which are the means of their livelihood). Protecting the subjects is the best duty for a Kshatriya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥