श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 295: पराशरगीता—विषयासक्त मनुष्यका पतन, तपोबलकी श्रेष्ठता तथा दृढ़तापूर्वक स्वधर्मपालनका आदेश  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  12.295.16-17 
आदित्या वसवो रुद्रास्तथैवाग्न्यश्विमारुता:।
विश्वेदेवास्तथा साध्या: पितरोऽथ मरुद्‍गणा:॥ १६॥
यक्षराक्षसगन्धर्वा: सिद्धाश्चान्ये दिवौकस:।
संसिद्धास्तपसा तात ये चान्ये स्वर्गवासिन:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तात! आदित्य, वसु, रुद्र, अग्नि, अश्विनीकुमार, वायु, विश्वेदेव, साध्य, पितर, मरुद्गण, यक्ष, राक्षस, गंधर्व, सिद्ध और अन्य स्वर्गीय देवता, इन सभी ने तपस्या के माध्यम से ही सिद्धियाँ प्राप्त की हैं।
 
Tat! Aditya, Vasu, Rudra, Agni, Ashwinikumar, Vayu, Vishvedev, Sadhya, Pitr, Marudgan, Yaksha, Rakshas, ​​Gandharva, Siddha and other heavenly gods, all of them have attained Siddhis only through penance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)