श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 292: पराशरगीता—धर्मोपार्जित धनकी श्रेष्ठता, अतिथि-सत्कारका महत्त्व, पाँच प्रकारके ऋणोंसे छूटनेकी विधि, भगवत्स्तवनकी महिमा एवं सदाचार तथा गुरुजनोंकी सेवासे महान् लाभ  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.292.8 
तैरेव फलपत्रैश्च स माठरमतोषयत्।
तस्माल्लेभे परं स्थानं शैब्योऽपि पृथिवीपति:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी के रक्षक महाराज शैब्य ने भी उन्हीं फलों और पत्तों से मथर ऋषि को संतुष्ट किया, जिससे उन्हें परम लोक की प्राप्ति हुई ॥8॥
 
The protector of the earth, Maharaja Shaibya, also satisfied the sage Mathar with the same fruits and leaves, due to which he attained the highest region. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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