Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.292.19: धर्म का पालन करने से जो धन प्राप्त होता है, वही सच्चा धन है। अधर्म से जो धन प्राप्त होता है, वह निंदनीय है। इस संसार में धन के लिए सनातन धर्म का कभी परित्याग नहीं करना चाहिए।॥19॥ | mahabharat अध्याय 12.292: पराशरगीता—धर्मोपार्जित धनकी श्रेष्ठता, अतिथि-सत्कारका महत्त्व, पाँच प्रकारके ऋणोंसे छूटनेकी विधि, भगवत्स्तवनकी महिमा एवं सदाचार तथा गुरुजनोंकी सेवासे महान् लाभ । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
येऽर्था धर्मेण ते सत्या येऽधर्मेण धिगस्तु तान्।
धर्मं वै शाश्वतं लोके न जह्याद् धनकाङ्क्षया॥ १९॥
अनुवाद
धर्म का पालन करने से जो धन प्राप्त होता है, वही सच्चा धन है। अधर्म से जो धन प्राप्त होता है, वह निंदनीय है। इस संसार में धन के लिए सनातन धर्म का कभी परित्याग नहीं करना चाहिए।॥19॥
The wealth that is obtained by following Dharma is the true wealth. The wealth that is obtained by unrighteousness is worthy of condemnation. One should never abandon the eternal Dharma for the sake of wealth in this world.॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥