Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.292.18: जो लोग पूजनीय नहीं थे, वे भी भगवान विष्णु की स्तुति करके पूज्य संत बन गए। इस संसार में निन्दनीय आचरण करके किसी को भी अपने उत्थान की आशा नहीं करनी चाहिए। 18॥ | mahabharat अध्याय 12.292: पराशरगीता—धर्मोपार्जित धनकी श्रेष्ठता, अतिथि-सत्कारका महत्त्व, पाँच प्रकारके ऋणोंसे छूटनेकी विधि, भगवत्स्तवनकी महिमा एवं सदाचार तथा गुरुजनोंकी सेवासे महान् लाभ । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो लोग पूजनीय नहीं थे, वे भी भगवान विष्णु की स्तुति करके पूज्य संत बन गए। इस संसार में निन्दनीय आचरण करके किसी को भी अपने उत्थान की आशा नहीं करनी चाहिए। 18॥
Even those who were not worthy of worship, became worshipable saints by praising Lord Vishnu. No one should hope for his rise in this world by behaving condemnably. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥