vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 292: पराशरगीता—धर्मोपार्जित धनकी श्रेष्ठता, अतिथि-सत्कारका महत्त्व, पाँच प्रकारके ऋणोंसे छूटनेकी विधि, भगवत्स्तवनकी महिमा एवं सदाचार तथा गुरुजनोंकी सेवासे महान् लाभ
»
श्लोक 13
श्लोक
12.292.13
विश्वामित्रस्य पुत्रत्वमृचीकतनयोऽगमत्।
ऋग्भि: स्तुत्वा महाबाहो देवान् वै यज्ञभागिन:॥ १३॥
अनुवाद
हे महाबाहु! यज्ञ में भाग लेने वाले देवताओं की वेद मन्त्रों से स्तुति करके ऋचीक का पुत्र विश्वामित्र का पुत्र हुआ ॥13॥
Great arms! Richika's son became the son of Vishwamitra after praising the gods participating in the yagya with Veda mantras. 13॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas