श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 290: पराशरगीताका आरम्भ—पराशर मुनिका राजा जनकको कल्याणकी प्राप्तिके साधनका उपदेश  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.290.8 
तस्मिन्नाश्रमिण: सन्त: स्वकर्माणीह कुर्वते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
सभी आश्रमों के लोग उस धर्म में लीन रहते हैं और इस संसार में अपने-अपने कर्तव्य निभाते हैं।
 
People of all the ashramas remain engrossed in that religion and perform their respective duties in this world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)