vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 290: पराशरगीताका आरम्भ—पराशर मुनिका राजा जनकको कल्याणकी प्राप्तिके साधनका उपदेश
»
श्लोक 5
श्लोक
12.290.5
तत: स तपसा युक्त: सर्वधर्मविधानवित्।
नृपायानुग्रहमना मुनिर्वाक्यमथाब्रवीत्॥ ५॥
अनुवाद
तब सम्पूर्ण धर्मों के नियमों को जानने वाले तपस्वी मुनि ने राजा जनक पर कृपा करने की इच्छा से इस प्रकार कहा ॥5॥
Then the ascetic sage, knowing the rules of all religions, desireing to bestow grace on King Janaka, spoke as follows. ॥ 5॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas