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mahabharat 12.290.5: तब सम्पूर्ण धर्मों के नियमों को जानने वाले तपस्वी मुनि ने राजा जनक पर कृपा करने की इच्छा से इस प्रकार कहा ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.290: पराशरगीताका आरम्भ—पराशर मुनिका राजा जनकको कल्याणकी प्राप्तिके साधनका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.290.5 
तत: स तपसा युक्त: सर्वधर्मविधानवित्।
नृपायानुग्रहमना मुनिर्वाक्यमथाब्रवीत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तब सम्पूर्ण धर्मों के नियमों को जानने वाले तपस्वी मुनि ने राजा जनक पर कृपा करने की इच्छा से इस प्रकार कहा ॥5॥
 
Then the ascetic sage, knowing the rules of all religions, desireing to bestow grace on King Janaka, spoke as follows. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)