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mahabharat 12.290.4: ‘मुनि! वह कौन सी वस्तु है जो इस लोक और परलोक में समस्त प्राणियों के लिए हितकर और जानने योग्य है? कृपया मुझे वह बताइए।’॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.290: पराशरगीताका आरम्भ—पराशर मुनिका राजा जनकको कल्याणकी प्राप्तिके साधनका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.290.4 
किं श्रेय: सर्वभूतानामस्मिंल्लोके परत्र च।
यद् भवेत् प्रतिपत्तव्यं तद् भवान् प्रब्रवीतु मे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
‘मुनि! वह कौन सी वस्तु है जो इस लोक और परलोक में समस्त प्राणियों के लिए हितकर और जानने योग्य है? कृपया मुझे वह बताइए।’॥4॥
 
‘Muni! What is that thing which is beneficial and worth knowing for all beings in this world and the next? Please tell me that.’॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)