श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 290: पराशरगीताका आरम्भ—पराशर मुनिका राजा जनकको कल्याणकी प्राप्तिके साधनका उपदेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.290.3 
भीष्म उवाच
अत्र ते वर्तयिष्यामि यथापूर्वं महायशा:।
पराशरं महात्मानं पप्रच्छ जनको नृप:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - युधिष्ठिर! इस विषय में भी मैं तुमसे एक प्राचीन घटना कहता हूँ। एक समय की बात है, महाराज जनक ने महात्मा पराशर मुनि से पूछा -
 
Bhishmaji said – Yudhishthir! Regarding this matter also, I will tell you an ancient incident. Once upon a time, the great King Janak asked Mahatma Parashar Muni -
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas