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परेषां यदसूयेत न तत् कुर्यात् स्वयं नर:।
यो ह्यसूयुस्तथायुक्त: सोऽवहासं नियच्छति॥ २४॥
अनुवाद
जो कार्य मनुष्य दूसरों के लिए निन्दा करता है, उसे स्वयं नहीं करना चाहिए। जो दूसरों की निन्दा करता है; वह स्वयं भी उन्हीं निंदनीय कार्यों में संलग्न रहता है और उपहास का पात्र बनता है।
Whatever action a person criticizes for others, he should not do it himself. One who criticizes others; But he himself continues to engage in the same condemnable acts and becomes an object of ridicule.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥