श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 290: पराशरगीताका आरम्भ—पराशर मुनिका राजा जनकको कल्याणकी प्राप्तिके साधनका उपदेश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.290.20 
दम: क्षमा धृतिस्तेज: संतोष: सत्यवादिता।
ह्रीरहिंसाऽव्यसनिता दाक्ष्यं चेति सुखावहा:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रिय संयम, क्षमा, धैर्य, तेज, संतोष, सत्य भाषण, लज्जा, अहिंसा, आसक्ति का अभाव और कार्यकुशलता - ये सब सुख देने वाले हैं ॥20॥
 
Restraint of senses, forgiveness, patience, sharpness, contentment, truthful speech, shyness, non-violence, absence of addiction and efficiency - all these give happiness. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)