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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 290: पराशरगीताका आरम्भ—पराशर मुनिका राजा जनकको कल्याणकी प्राप्तिके साधनका उपदेश
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श्लोक 16
श्लोक
12.290.16
चक्षुषा मनसा वाचा कर्मणा च चतुर्विधम्।
कुरुते यादृशं कर्म तादृशं प्रतिपद्यते॥ १६॥
अनुवाद
मनुष्य नेत्र, मन, वाणी और कर्म से चार प्रकार के कर्म करता है और अपने कर्मों के अनुसार ही फल भोगता है ॥16॥
A human being performs four kinds of actions through his eyes, mind, speech and actions, and receives the fruits of his actions as per his deeds. ॥16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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