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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 289: भृगुपुत्र उशनाका चरित्र और उन्हें शुक्र नामकी प्राप्ति
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श्लोक 14
श्लोक
12.289.14
क्वासौ क्वासाविति प्राह गृहीत्वा परमायुधम्।
उशना दूरतस्तस्य बभौ ज्ञात्वा चिकीर्षितम्॥ १४॥
अनुवाद
उस उत्तम अस्त्र को लेकर वह सहसा बोला, ‘वह कहाँ है, उशना कहाँ है?’ महादेवजी क्या करना चाहते थे, यह जानकर उशना उनसे दूर हट गई॥ 14॥
Taking that excellent weapon, he suddenly said, 'Where is he, where is Ushna?' Knowing what Mahadeva wanted to do, Ushna moved away from him.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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