श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 288: अरिष्टनेमिका राजा सगरको वैराग्योत्पादक मोक्षविषयक उपदेश  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.288.9 
भार्यां पुत्रवतीं वृद्धां लालितां पुत्रवत्सलाम्।
ज्ञात्वा प्रजहि कालेन परार्थमनुदृश्य च॥ ९॥
 
 
अनुवाद
पत्नी वृद्ध हो गई है और उसने एक पुत्र को जन्म दिया है। अब पुत्र उसका पालन-पोषण कर रहे हैं और वह भी उनसे पूर्ण स्नेह रखती है। ऐसा जानकर मनुष्य को मोक्ष को ही परम लक्ष्य बनाकर समय आने पर उसका परित्याग कर देना चाहिए।'॥9॥
 
'The wife has become old and has given birth to a son. Now the sons are taking care of her and she too has full affection for them. Knowing this, one should make the ultimate goal of salvation and abandon her in due course.'॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)