श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 288: अरिष्टनेमिका राजा सगरको वैराग्योत्पादक मोक्षविषयक उपदेश  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.288.4 
भीष्म उवाच
एवमुक्तस्तदा तार्क्ष्य: सर्वशास्त्रविदां वर:।
विबुध्य सम्पदं चाग्रॺां सद्वाक्यमिदमब्रवीत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन! राजा सगर के इस प्रकार पूछने पर समस्त विद्वानों में श्रेष्ठ तार्क्ष्य (अरिष्टनेमि) ने उनमें उत्तम दैवी सम्पदा के गुणों को जानकर उन्हें इस प्रकार उत्तम उपदेश दिया -॥4॥
 
Bhishmaji says – King! On King Sagar asking in this manner, Tarkshya (Arishtanemi), the best among all the scholars, knowing the qualities of the best divine wealth in him, gave him the best advice in this way -॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)