vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 288: अरिष्टनेमिका राजा सगरको वैराग्योत्पादक मोक्षविषयक उपदेश
»
श्लोक 15
श्लोक
12.288.15
स्वजने न च ते चिन्ता कर्तव्या मोक्षबुद्धिना।
इमे मया विनाभूता भविष्यन्ति कथं त्विति॥ १५॥
अनुवाद
यदि तुम्हारा मन मोक्ष में लगा हुआ है, तो तुम्हें अपने स्वजनों के विषय में यह सोचकर चिन्ता नहीं करनी चाहिए कि मेरे बिना वे कैसे जीवित रहेंगे ॥15॥
"If your mind is focused on liberation, then you should not worry about your relatives, wondering how they will survive without me." ॥15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×