vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 287: नारदजीका गालव मुनिको श्रेयका उपदेश
»
श्लोक 22
श्लोक
12.287.22
धर्मेण वेदाध्ययनं वेदान्तानां तथैव च।
ज्ञानार्थानां च जिज्ञासा श्रेय एतदसंशयम्॥ २२॥
अनुवाद
वेद-वेदांगों का धार्मिक रीति से स्वाध्याय करना तथा उनके तत्त्वों को जानने की इच्छा को जीवित रखना निःसंदेह कल्याण का साधन है ॥22॥
Self-study of Vedas and Vedas in a religious manner and keeping the desire to know their principles alive is undoubtedly a means of welfare. 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×