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mahabharat 12.286.9: जिनके पास हज़ार रुपये हैं, वे भी जीवित रहते हैं। जिनके पास सैकड़ों रुपये हैं, वे भी जीवित रहते हैं। दूसरे लोग केवल शाक-भाजी खाकर जीवित रहते हैं। उसी प्रकार हमें भी जीवित समझो॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.286: समङ्गके द्वारा नारदजीसे अपनी शोकहीन स्थितिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 286: समङ्गके द्वारा नारदजीसे अपनी शोकहीन स्थितिका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.286.9 
सहस्रिणोऽपि जीवन्ति जीवन्ति शतिनस्तथा।
शाकेन चान्ये जीवन्ति पश्यास्मानपि जीवत:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जिनके पास हज़ार रुपये हैं, वे भी जीवित रहते हैं। जिनके पास सैकड़ों रुपये हैं, वे भी जीवित रहते हैं। दूसरे लोग केवल शाक-भाजी खाकर जीवित रहते हैं। उसी प्रकार हमें भी जीवित समझो॥9॥
 
Those who have thousands of rupees also live. Those who have hundreds of rupees also live. Other people live only on vegetables. In the same way, consider us also alive.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)