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mahabharat 12.286.19: धन और कामना का त्याग करके तथा कामना और आसक्ति का पूर्णतः त्याग करके मैं इस पृथ्वी पर दुःख और संताप से मुक्त होकर विचरण करता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 12.286: समङ्गके द्वारा नारदजीसे अपनी शोकहीन स्थितिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 286: समङ्गके द्वारा नारदजीसे अपनी शोकहीन स्थितिका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.286.19 
अर्थकामौ परित्यज्य विशोको विगतज्वर:।
तृष्णामोहौ तु संत्यज्य चरामि पृथिवीमिमाम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
धन और कामना का त्याग करके तथा कामना और आसक्ति का पूर्णतः त्याग करके मैं इस पृथ्वी पर दुःख और संताप से मुक्त होकर विचरण करता हूँ।
 
Having renounced wealth and desire and having completely given up desire and attachment, I wander upon this earth free from sorrow and anguish.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)