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mahabharat 12.286.16: जिसका मन योग में नहीं लगा है, वह समता को प्राप्त नहीं होता। योग के बिना कोई भी सुख को प्राप्त नहीं करता। नरेश्वर! दुःखों का त्याग और धैर्य - ये दो सुख के कारण हैं। 16॥   |   mahabharat अध्याय 12.286: समङ्गके द्वारा नारदजीसे अपनी शोकहीन स्थितिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 286: समङ्गके द्वारा नारदजीसे अपनी शोकहीन स्थितिका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.286.16 
नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य नायोगाद् विन्दते सुखम्।
धृतिश्च दु:खत्यागश्चेत्युभयं तु सुखं नृप॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जिसका मन योग में नहीं लगा है, वह समता को प्राप्त नहीं होता। योग के बिना कोई भी सुख को प्राप्त नहीं करता। नरेश्वर! दुःखों का त्याग और धैर्य - ये दो सुख के कारण हैं। 16॥
 
One whose mind is not engaged in yoga does not attain equanimity. No one attains happiness without yoga. Nareshwar! Renunciation of sorrows and patience – these two are the causes of happiness. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)