Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.286.13: मेरे जैसा मनुष्य संसार को बदलता हुआ देखकर कभी व्याकुल नहीं होता। वह इच्छित भोगों और सुखों की खोज नहीं करता और यदि दुःख भी मिले तो उसकी चिन्ता नहीं करता॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.286: समङ्गके द्वारा नारदजीसे अपनी शोकहीन स्थितिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 286: समङ्गके द्वारा नारदजीसे अपनी शोकहीन स्थितिका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.286.13 
भवात्मकं सम्परिवर्तमानं
न मादृश: संज्वरं जातु कुर्यात्।
इष्टान् भोगान् नानुरुध्येत् सुखं वा
न चिन्तयेद् दु:खमभ्यागतं वा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
मेरे जैसा मनुष्य संसार को बदलता हुआ देखकर कभी व्याकुल नहीं होता। वह इच्छित भोगों और सुखों की खोज नहीं करता और यदि दुःख भी मिले तो उसकी चिन्ता नहीं करता॥13॥
 
A person like me never gets upset seeing the world changing. He does not pursue the desired pleasures and happiness and if he faces sorrow, he does not worry about it.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)