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mahabharat 12.286.10: हे नारद! जब हमारा अज्ञान दूर हो गया है, तब हम शोक नहीं करते, तो फिर धर्म और सांसारिक कर्मों से हमारा क्या प्रयोजन? सभी सुख-दुःख क्षणिक हैं, क्योंकि वे काल के अधीन हैं, अतः वे ज्ञानी पुरुष को परास्त नहीं कर सकते॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.286: समङ्गके द्वारा नारदजीसे अपनी शोकहीन स्थितिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 286: समङ्गके द्वारा नारदजीसे अपनी शोकहीन स्थितिका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.286.10 
यदा न शोचेमहि किं नु न: स्याद्
धर्मेण वा नारद कर्मणा वा।
कृतान्तवश्यानि यदा सुखानि
दु:खानि वा यन्न विधर्षयन्ति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे नारद! जब हमारा अज्ञान दूर हो गया है, तब हम शोक नहीं करते, तो फिर धर्म और सांसारिक कर्मों से हमारा क्या प्रयोजन? सभी सुख-दुःख क्षणिक हैं, क्योंकि वे काल के अधीन हैं, अतः वे ज्ञानी पुरुष को परास्त नहीं कर सकते॥10॥
 
O Narada! When we do not grieve because our ignorance has been dispelled, then what is our use of religion or worldly deeds? All happiness and sorrows are momentary because they are subject to time, hence they cannot defeat a wise man.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)