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mahabharat 12.285.44: जो लोग तैरने की कला जानते हैं, वे गहरे जल को तैरकर पार कर जाते हैं। उन्हें कष्ट नहीं उठाना पड़ता। इसी प्रकार, जो धैर्यवान पुरुष अध्यात्म-तत्त्व को जानते हैं, वे संसार सागर को सहज ही पार कर जाते हैं। उनके लिए परम ज्ञान ही जहाज बन जाता है।॥4 4॥   |   mahabharat अध्याय 12.285: अध्यात्मज्ञानका और उसके फलका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 285: अध्यात्मज्ञानका और उसके फलका वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.285.44 
नैव ताम्यन्ति विद्वांस: प्लवन्त: पारमम्भस:।
अध्यात्मविदुषो धीरा ज्ञानं तु परमं प्लव:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जो लोग तैरने की कला जानते हैं, वे गहरे जल को तैरकर पार कर जाते हैं। उन्हें कष्ट नहीं उठाना पड़ता। इसी प्रकार, जो धैर्यवान पुरुष अध्यात्म-तत्त्व को जानते हैं, वे संसार सागर को सहज ही पार कर जाते हैं। उनके लिए परम ज्ञान ही जहाज बन जाता है।॥4 4॥
 
Those who know the art of swimming, they cross the deep waters by swimming. They do not have to suffer. Similarly, the patient men who know the spiritual principles cross the ocean of the world effortlessly. For them, supreme knowledge itself becomes the ship.॥ 4 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)