Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.285.25-26h: जब रजोगुण की ओर प्रवृत्ति होती है, तब बुद्धि राजसिक भावों का अनुसरण करती है। यदि किसी भी प्रकार से मनुष्य में अधिक सुख, प्रेम, आनंद, प्रसन्नता और मन की शांति उपलब्ध होती है, तो ये सात्विक गुण हैं। 25 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.285: अध्यात्मज्ञानका और उसके फलका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब रजोगुण की ओर प्रवृत्ति होती है, तब बुद्धि राजसिक भावों का अनुसरण करती है। यदि किसी भी प्रकार से मनुष्य में अधिक सुख, प्रेम, आनंद, प्रसन्नता और मन की शांति उपलब्ध होती है, तो ये सात्विक गुण हैं। 25 1/2॥
When there is a tendency towards Rajoguna then the intellect follows Rajasic sentiments. If in any way more happiness, love, joy, happiness and peace of mind is available in a man, then these are Satvik qualities. 25 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥