श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 285: अध्यात्मज्ञानका और उसके फलका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.285.21 
अधिष्ठानानि बुद्धॺा हि पृथगेतानि पञ्चधा।
इन्द्रियाणीति तान्याहुस्तेषु दुष्टेषु दुष्यति॥ २१॥
 
 
अनुवाद
बुद्धि के इन पाँच पृथक् आधारों को इन्द्रियाँ कहते हैं। जब ये इन्द्रियाँ दूषित हो जाती हैं, तो बुद्धि भी दूषित हो जाती है। ॥21॥
 
These five separate foundations of the intellect are called the senses. When these senses get polluted, the intellect also gets polluted. ॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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