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श्लोक 12.285.14  |
यदूर्ध्वं पादतलयोरवाङ् मूर्ध्नश्च पश्यसि।
एतस्मिन्नेव कृत्स्नेयं वर्तते बुद्धिरन्तरे॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| यह बुद्धि पैरों के तलवों से ऊपर और सिर से नीचे तक सम्पूर्ण शरीर में व्याप्त है ॥14॥ |
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| This intelligence is pervading the entire body, from the soles of the feet upwards and from the head downwards. ॥ 14॥ |
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