श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 285: अध्यात्मज्ञानका और उसके फलका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.285.14 
यदूर्ध्वं पादतलयोरवाङ् मूर्ध्नश्च पश्यसि।
एतस्मिन्नेव कृत्स्नेयं वर्तते बुद्धिरन्तरे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यह बुद्धि पैरों के तलवों से ऊपर और सिर से नीचे तक सम्पूर्ण शरीर में व्याप्त है ॥14॥
 
This intelligence is pervading the entire body, from the soles of the feet upwards and from the head downwards. ॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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