| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 285: अध्यात्मज्ञानका और उसके फलका वर्णन » श्लोक 10 |
|
| | | | श्लोक 12.285.10  | शब्दश्रोत्रे तथा खानि त्रयमाकाशयोनिजम्।
रस: स्नेहश्च जिह्वा च अपामेते गुणा: स्मृता:॥ १०॥ | | | | | | अनुवाद | | शब्द, श्रोत्र और समस्त रोमकूप - ये तीन आकाश के कार्य हैं। रस, स्नेह और जिह्वा - ये तीन जल के गुण या कार्य माने गए हैं।॥10॥ | | | | Sound, the sense of hearing and all the pores—these three are the functions of space. Rasa, affection and tongue—these three are considered to be the qualities or functions of water.॥10॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|