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mahabharat 12.284.99: भगवान शिव को नमस्कार है, जिनके मंदिर की घंटियाँ हजारों लोगों द्वारा बजाई जाती हैं, जिन्हें घंटियों की माला प्रिय है, जिनका जीवन ही घंटी के समान ध्वनि करता है, जो गंध और ध्वनि के अवतार हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  12.284.99 
सहस्राध्मातघण्टाय घण्टामालाप्रियाय च।
प्राणघण्टाय गन्धाय नम: कलकलाय च॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
भगवान शिव को नमस्कार है, जिनके मंदिर की घंटियाँ हजारों लोगों द्वारा बजाई जाती हैं, जिन्हें घंटियों की माला प्रिय है, जिनका जीवन ही घंटी के समान ध्वनि करता है, जो गंध और ध्वनि के अवतार हैं।
 
Salutations to Lord Shiva, whose temple's bells are rung by thousands of people, who loves the garland of bells, whose very life sounds like a bell, who is the embodiment of smell and noise.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)