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mahabharat 12.284.89: आप आयु में ज्येष्ठ और गुणों में श्रेष्ठ हैं। आपने ही इन्द्र रूप धारण करके बल नामक दैत्य का मंथन किया था। आप काल के नियंत्रक और सर्वशक्तिमान हैं। आप ही महाप्रलय और द्वितीय प्रलय भी हैं। आपको नमस्कार है। 89.   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  12.284.89 
नमो ज्येष्ठाय श्रेष्ठाय बलप्रमथनाय च।
कालनाथाय कल्याय क्षयायोपक्षयाय च॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
आप आयु में ज्येष्ठ और गुणों में श्रेष्ठ हैं। आपने ही इन्द्र रूप धारण करके बल नामक दैत्य का मंथन किया था। आप काल के नियंत्रक और सर्वशक्तिमान हैं। आप ही महाप्रलय और द्वितीय प्रलय भी हैं। आपको नमस्कार है। 89.
 
You are the eldest in age and the best in qualities. You had churned the demon named Bal in the form of Indra. You are the controller of time and all-powerful. You are also the great deluge and the second deluge. Salutations to you. 89.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)