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mahabharat 12.284.86: आपकी नाक पतली है, इसलिए आप कृष्ण कहलाते हैं। आपके अंग पतले हैं, इसलिए आप कृषांग कहलाते हैं और आपका शरीर दुबला-पतला है। आप परम आनंद से परिपूर्ण हैं, विशेष सुख का अनुभव करते हैं और हंसी की ध्वनि हैं। आपको नमस्कार है। 86।   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  12.284.86 
नमोऽस्तु कृशनासाय कृशाङ्गाय कृशाय च।
संहृष्टाय विहृष्टाय नम: किलकिलाय च॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
आपकी नाक पतली है, इसलिए आप कृष्ण कहलाते हैं। आपके अंग पतले हैं, इसलिए आप कृषांग कहलाते हैं और आपका शरीर दुबला-पतला है। आप परम आनंद से परिपूर्ण हैं, विशेष सुख का अनुभव करते हैं और हंसी की ध्वनि हैं। आपको नमस्कार है। 86।
 
Your nose is thin, so you are called Krishanas. Your limbs are thin, so you are called Krishang and your body is lean. You are full of great joy, experience special happiness and are the sound of laughter. Salutations to you. 86.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)