Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.284.82: आप प्रमथगणों के स्वामी हैं। आपके कंधे बैल के कंधों के समान विशाल हैं। आप पिनाक धनुष धारण करते हैं। आप शत्रुओं का नाश करने वाले और दण्ड के स्वरूप हैं। किरात या तपस्वी के रूप में विचरण करते समय आप भोजपत्र और छाल के वस्त्र धारण करते हैं। आपको नमस्कार है। | mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आप प्रमथगणों के स्वामी हैं। आपके कंधे बैल के कंधों के समान विशाल हैं। आप पिनाक धनुष धारण करते हैं। आप शत्रुओं का नाश करने वाले और दण्ड के स्वरूप हैं। किरात या तपस्वी के रूप में विचरण करते समय आप भोजपत्र और छाल के वस्त्र धारण करते हैं। आपको नमस्कार है।
You are the lord of the Pramathganas. Your shoulders are as full as the shoulders of a bull. You carry the Pinaka bow. You are the destroyer of enemies and the embodiment of punishment. While roaming about as a Kirat or ascetic, you wear Bhojapatra and bark clothes. Salutations to you.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥