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mahabharat 12.284.66: महादेव से वरदान प्राप्त करने के बाद, दक्ष ने भूमि पर घुटने टेककर उन्हें प्रणाम किया और एक हजार आठ नामों से भगवान वृषभध्वज की स्तुति की।   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  12.284.66 
जानुभ्यामवनीं गत्वा दक्षो लब्ध्वा भवाद् वरम्।
नाम्नामष्टसहस्रेण स्तुतवान् वृषभध्वजम्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
महादेव से वरदान प्राप्त करने के बाद, दक्ष ने भूमि पर घुटने टेककर उन्हें प्रणाम किया और एक हजार आठ नामों से भगवान वृषभध्वज की स्तुति की।
 
After receiving the boon from Mahadeva, Daksha knelt down on the ground and paid his respects to Him and praised Lord Vrishabhadhwaj by using one thousand and eight names.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)