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श्लोक 12.284.53-54  |
वीरभद्र इति ख्यातो रुद्रकोपाद् विनि:सृत:॥ ५३॥
भद्रकालीति विख्याता देव्या: कोपाद् विनि:सृता।
प्रेषितौ देवदेवेन यज्ञान्तिकमिहागतौ॥ ५४॥ |
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| अनुवाद |
| मेरा नाम वीरभद्र है। मैं रुद्रदेव के क्रोध से प्रकट हुआ हूँ। यह स्त्री भद्रकाली कहलाती है और देवी पार्वती के क्रोध से प्रकट हुई है। देवों के देव महादेव ने हम दोनों को यहाँ भेजा है। इसीलिए हम दोनों इस यज्ञ के निकट आए हैं। 53-54 |
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| My name is Veerbhadra. I have appeared due to the anger of Rudradev. This woman is known as Bhadrakali and has appeared due to the anger of Goddess Parvati. The lord of gods Mahadev has sent both of us here. That is why we both have come near this yajna. 53-54. |
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