श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 50-51h
 
 
श्लोक  12.284.50-51h 
ततो ब्रह्मादयो देवा दक्षश्चैव प्रजापति:॥ ५०॥
ऊचु: प्राञ्जलय: सर्वे कथ्यतां को भवानिति।
 
 
अनुवाद
तब ब्रह्मा और प्रजापति दक्ष आदि देवताओं ने हाथ जोड़कर कहा - 'देवता! मुझे बताइए, आप कौन हैं?'॥50 1/2॥
 
Then the gods like Brahma and Prajapati Daksha, all of them folded their hands and said, 'Devta (Gods)! Tell me, who are you?'॥ 50 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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